शुक्रवार 2 अक्टूबर 2026 - 15:01
मरजेइयत पर विश्वास ग़ैबत-ए-कुबरा में इमाम-ए-ज़माना पर ईमान का प्रतीक है: मौलाना मोहम्मद मेराज रन्नवी

पेरिस, चेन्नई, तमिलनाडु में नमाज़-ए-जुमा के ख़तीब मौलाना मोहम्मद मेराज रन्नवी ने ख़ुत्बा-ए-जुमा में हज़रत इमाम हसन अस्करी (अ) के जीवन, उनकी इमामत के दौर और उस समय शिया समुदाय के साथ मरजइयत के संबंध पर विस्तार से प्रकाश डाला।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, पेरिस, चेन्नई, तमिलनाडु में नमाज़-ए-जुमा के ख़तीब मौलाना मोहम्मद मेराज रनवी ने ख़ुत्बा-ए-जुमा में हज़रत इमाम हसन अस्करी (अ) के जीवन, उनकी इमामत के दौर और उस समय शिया समुदाय के साथ मरजइयत के संबंध पर विस्तार से प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि हज़रत इमाम हसन अस्करी (अ) का दौर शिया समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था। उस समय शिया समुदाय को अनेक सामाजिक और धार्मिक चुनौतियों का सामना था। ऐसे हालात में इमाम (अ) ने अपने अनुयायियों के धार्मिक मार्गदर्शन, उनकी एकता और सही इस्लामी शिक्षाओं से उनके संबंध को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया।

मरजेइयत शिया समाज के मार्गदर्शन का महत्वपूर्ण माध्यम

मौलाना मोहम्मद मेराज रन्नवी ने मरजइयत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ग़ैबत-ए-कुबरा के दौर में धार्मिक मामलों में योग्य और विश्वसनीय मरजा-ए-तक़लीद से मार्गदर्शन प्राप्त करना शिया समाज के लिए महत्वपूर्ण है। मरजइयत पर विश्वास और संतोष वास्तव में हज़रत इमाम-ए-ज़माना (अ) की पवित्र और मासूम ज़ात पर ईमान और भरोसे से जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि इंसान जिस दौर में अपने मासूम इमाम की प्रत्यक्ष ज़ियारत से वंचित हो, उस दौर में दीन की सही समझ और धार्मिक मार्गदर्शन से जुड़े रहना उसकी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। मरजइयत इसी धार्मिक मार्गदर्शन की व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि अपने दौर के मासूम इमाम पर ईमान वास्तव में अल्लाह तआला पर ईमान की निशानी है। इंसान का ईमान केवल ज़बान से दावे तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसके विश्वास, आचरण और जीवन के फैसलों में भी उसका प्रभाव दिखाई देना चाहिए।

अल्लाह पर ईमान और मोमिनों के लिए लाभकारी होना

ख़तीब-ए-जुमा ने हज़रत इमाम हसन अस्करी (अ) के एक नूरानी फ़रमान का उल्लेख करते हुए कहा कि इंसान के लिए दो गुणों से बढ़कर कोई दूसरी चीज़ नहीं हो सकती। इनमें पहला गुण अल्लाह तआला पर ईमान और दूसरा मोमिन भाइयों के लिए लाभकारी होना है।

मौलाना ने कहा कि अल्लाह तआला पर सच्चा ईमान इंसान को आध्यात्मिक और नैतिक पूर्णता की ओर ले जाता है। जब इंसान के दिल में अल्लाह का विश्वास मजबूत होता है तो उसके विचार, व्यवहार और सामाजिक संबंध भी उसी ईमान से प्रभावित होते हैं।

उन्होंने कहा कि ईमान का वास्तविक प्रभाव इंसान के चरित्र में दिखाई देना चाहिए। केवल इबादत करना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि इंसान को अपने आसपास रहने वाले लोगों के लिए भी भलाई और राहत का माध्यम बनना चाहिए।

मौलाना ने कहा कि जो व्यक्ति अपने मोमिन भाइयों के लिए लाभ और भलाई का माध्यम बनता है, वह समाज में सम्मान प्राप्त करता है। ऐसे व्यक्ति का सम्मान केवल आम लोगों की नज़र में ही नहीं होता, बल्कि वह धार्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है और इमाम (अ) की नज़र में भी सम्मानित होता है।

मोमिनों की सेवा ईमान का व्यावहारिक रूप

उन्होंने कहा कि एक-दूसरे की मदद करना, ज़रूरतमंद मोमिनों का साथ देना, उनकी परेशानियों को समझना और अपनी क्षमता के अनुसार उनकी समस्याओं को दूर करने का प्रयास करना धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा कि समाज की वास्तविक शक्ति उसके लोगों के बीच मौजूद आपसी विश्वास, भाईचारे और सहयोग से पैदा होती है। यदि मोमिन एक-दूसरे के दुख-दर्द में सहभागी बनें और व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर सामूहिक हित को महत्व दें तो समाज अनेक समस्याओं का सामना बेहतर ढंग से कर सकता है।

उन्होंने मोमेनीन को नसीहत करते हुए कहा कि हमें अपने व्यवहार की समीक्षा करनी चाहिए और यह देखना चाहिए कि हमारे अस्तित्व से दूसरे लोगों को कितना लाभ पहुंच रहा है। इंसान का मूल्य केवल उसके व्यक्तिगत कार्यों से नहीं, बल्कि इस बात से भी निर्धारित होता है कि वह समाज के लिए कितना उपयोगी है।

आपसी मतभेद और खींचतान से समाज कमजोर होता है

ख़तीब-ए-जुमा ने समाज में बढ़ती आपसी खींचतान, मतभेद और एक-दूसरे के प्रति नापसंदगी की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि जब लोग एक-दूसरे को नुकसान पहुंचाने, नीचा दिखाने या अपने व्यक्तिगत हितों को प्राथमिकता देने लगते हैं तो इससे पूरी क़ौम कमजोर होती है।

उन्होंने कहा कि आपसी मतभेद और दिलों में एक-दूसरे के प्रति नफ़रत केवल व्यक्तिगत समस्या नहीं, बल्कि पूरे समाज को प्रभावित करने वाली समस्या है। मोमिनों के बीच भाईचारा, सम्मान और सहयोग का वातावरण बनाए रखना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि क़ौम के भीतर खींचतान, निरंतर विवाद और एक-दूसरे के प्रति नापसंदगी वास्तव में अल्लाह तआला पर ईमान की कमजोरी का परिणाम हो सकती है। सच्चा ईमान इंसान को विनम्रता, भाईचारे, सहनशीलता और दूसरों के अधिकारों का सम्मान करना सिखाता है।

क़ौम की बदहाली का एक कारण आपसी सहयोग की कमी

मौलाना मोहम्मद मेराज रन्नवी ने कहा कि किसी क़ौम की बदहाली, पिछड़ापन और गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं, लेकिन मोमिन भाइयों के बीच एक-दूसरे के लिए लाभकारी बनने की भावना का कमजोर होना भी एक महत्वपूर्ण कारण है।

उन्होंने कहा कि जब समाज के लोग एक-दूसरे की मदद से दूर हो जाते हैं और हर व्यक्ति केवल अपने व्यक्तिगत हितों तक सीमित हो जाता है तो सामाजिक एकता कमजोर होने लगती है। इसके परिणामस्वरूप समाज में समस्याएं बढ़ती हैं और सामूहिक शक्ति प्रभावित होती है।

उन्होंने मोमेनीन से अपील की कि वे एक-दूसरे की मदद को अपनी धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारी समझें तथा समाज में सहयोग, भाईचारे और आपसी सम्मान की संस्कृति को मजबूत करें।

इमाम हसन अस्करी (अ) की शिक्षाओं पर अमल की जरूरत

ख़तीब-ए-जुमा ने कहा कि हज़रत इमाम हसन अस्करी (अ) की शिक्षाएं केवल इतिहास का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि आज भी हमारे लिए मार्गदर्शन का स्रोत हैं। विशेष रूप से ईमान, अच्छे आचरण, मोमिनों के अधिकार और समाज के प्रति जिम्मेदारी के संबंध में उनकी शिक्षाओं को अपने जीवन में लागू करने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि अगर हम वास्तव में अहलेबैत (अ) के अनुयायी होने का दावा करते हैं तो हमारे व्यवहार में भी उनकी शिक्षाओं की झलक दिखाई देनी चाहिए। एक-दूसरे के लिए भलाई का माध्यम बनना, दुख में साथ देना, मतभेदों को बढ़ाने के बजाय उन्हें दूर करना और समाज की एकता को मजबूत करना हमारी जिम्मेदारी है।

ख़ुत्बे के अंत में मौलाना मोहम्मद मेराज रन्नवी ने मोमेनीन को धार्मिक और सामाजिक जिम्मेदारियों पर अमल करने की नसीहत की। उन्होंने अल्लाह तआला से दुआ की कि मोमिनों के बीच एकता, भाईचारा और आपसी सहयोग को मजबूत करे तथा समाज को हर प्रकार के मतभेद और फूट से सुरक्षित रखे।

इस अवसर पर ईरान को दुनिया के ज़ालिमों के सामने कामयाबी और विजय प्रदान करने तथा अत्याचारियों के विनाश के लिए भी दुआ की गई। साथ ही हज़रत इमाम-ए-असर, इमाम महदी (अ) के जल्द ज़ुहूर, उनके ज़ुहूर के लिए परिस्थितियों की तैयारी और पूरी दुनिया में इंसाफ़ व न्याय की स्थापना के लिए विशेष दुआ की गई।

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